हमारे रिश्ते कितने भी गहरे मगर, कुछ इस तरह से क्यो होते है, नदी के दो किनारों की तरह , कभी ये पास तो कभी दूर -दूर होते है, कभी न मिलने वाले ये किनारे , फिर भी सदियों तक , साथ साथ चलते है.
परम स्नेही माता-पिता को जिनके पावन वात्सल्य स्मृतियों के छत्र-छाया में , मै सदा सफलता की तरफ़ अग्रसर रहा हू. उन्ही की स्मृतियों को संजोये मै अपना समस्त जीवन उनके चरणों में समर्पित करता हू.